मक्काह को छोड़ मदीना में हुजूर सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम क्यों चले आए थे
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मक्काह को छोड़ मदीना में आप क्यों चले आए
जब हुजूर सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम ने मक्काह के लोगों को अल्लाह की तौहीद की तालीम दी और उनसे फरमाया के बुत परस्ती छोड़ दो और एक अल्लाह पर ईमान लाओ |तो वह लोग आपके दुश्मन हो गए क्योंकि वह बुतों की इबादत करते थे|और उनको माबुद समझते थे| और तरह तरह से उन्होंने हुजूर सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम को तकलीफ पहुंचाने शुरू कर दी| हुजूर सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम की अदावत और दुश्मनी की शख्तियाँ और तकलीफ बर्दाश्त करते और तौहीद की तालीम देते और अल्लाह के अहकाम पहुंचाते रहे | मगर जब उनकी दुश्मनी की कोई हद बाकी न रही| और सब ने मिलकर हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को कत्ल कर देने का इरादा कर लिया तो हुजूर सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम अल्लाह के हुक्म से अपने प्यारे वतन मक्काह मुअज्जमा को छोड़कर मदीना मुनव्वरा में तशरीफ ले गए| मदीना मुनव्वरा के लोग पहले मुसलमान हो चुके थे और हुजूर सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम के मदीना में तशरीफ लाने के निहायत मुस्ताक थे जब हुजूर सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम मदीना मुनव्वरा में हिजरत को पहुंचे तो उन अंसार वालों ने मुहाजिरिन की अपनी जान व माल से बहुत मदद की| हिजरत किसे कहते हैं? हुजूर सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम को मक्काह से मदीना मुनव्वरा चले जाने को हिजरत कहते हैं अंसार किसे कहते हैं? मदीना के मुसलमान जिन्होंने आज हुजूर सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम और मुहाजिरीन की मदद की उन्हें अंसार कहते हैं मुहाजिरीन किसे कहते हैं? जो मुसलमान अपने घर बार छोड़कर मक्काह से मदीना चले आए उसे मुहाजिरीन कहते हैं हुजूर सल्ला वाले वसल्लम के मदीना मुनव्वरा में तशरीफ ले जाने की खुशखबरी सुनकर और मुसलमान भी जो काफी सता रहे थे आहिस्ता आहिस्ता मदीना मुनव्वरा में चले गए हजरत सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम की मक्का से मदीना मुनव्वरा चले जाने को हिजरत कहते हैं और मुसलमानों को जो अपने घर बार छोड़कर मक्का से मदीना चले आए उसे मुहाजिरीन कहते हैं और मदीना के मुसलमान जिन्होंने आज रसल वाले वसल्लम और मुहाजिरीन की मदद की उन्हें अंसार कहते हैं इस्लाम के कुछ रोचक तथ्य
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